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कॉपी के मूल्यांकन में घोटाले का आरोप

शिक्षकों ने बैठक में मूल्यांकन के बहिष्कार का लिया निर्णय
फोटो- एपीएसयू की फाइल फोटो।
एपीएसयू का मामला
रीवा। रीवा न्यूज़ मीडिया प्रतिनिधि
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय और उससे संबंधित कालेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य करने वाले शिक्षकों में इन दिनों मूल्यांकन के पैसे को लेकर आक्रोश व्याप्त है। उनका आरोप है कि जो रेट शासन द्वारा निर्धारित किया गया है मूल्यांकन के समय यह रेट विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हें नहीं दे रहा है। जिसके चलते मूल्यांकनकर्ताओं को उनकी मेहनत का पूरा पैसा नहीं मिल पाता है। मूल्यांकनकर्ताओं ने बताया कि वर्तमान समय में एपीएस प्रशासन 10 रुपए प्रति कॉपी मूल्यांकन का पैसा दे रहा है। जबकि शासन द्वारा मूल्यांकन के लिए यूजी कक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के लिए 20 रुपए और पीजी कक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए 25 रुपए रेट निर्धारित किए हुए है। विश्वविद्यालय प्रशासन 10 रुपए यूजी और 15 रुपए पीजी कक्षाओं का मूल्यांकन का पैसा दे रहा है। उस हिसाब से दोनों ही कक्षाओं में प्रति कॉपी में 10 रुपए गोलमाल किया जा रहा है। उस हिसाब से लम्बी चौड़ी रकम मूल्यांकनकर्ताओं की हजम की जा रही है। उन्होंने बताया कि मूल्यांकन के लिए शासन से रेट निर्धारित हैं और इसे कॉडिनेशन कमेटी ने निर्धारित किया था। तो वहीं ईसी में भी मूल्यांकन का यह रेट पास हो चुका है। लेकिन आदेश जारी न होने के कारण मूल्यांकनकर्ताओं को पूरा पैसा नहीं मिल पा रहा है।
4 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करवाता है और इसके लिए योग्य शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है। लेकिन पूरा पैसा न मिलने के कारण मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों का मन मूल्यांकन को लेकर नहीं लग रहा है। उनका कहना है कि जब कॉडिनेशन कमेटी ने मूल्यांकन के लिए पैसे निर्धारित किए हैं तो फिर उन्हें पूरा पैसा मिलना चाहिए। पूरा पैसा न मिलने की स्थिति में मूल्यांकर्ताओं का मन नहीं लगता तो वहीं मूल्यांकन के नाम पर लाखों रुपए की रकम विश्वविद्यालय प्रशासन गोलमाल कर रहा है।
घरों में भेजी जा रही कॉपी
शिक्षकों में मूल्यांकन को लेकर व्याप्त आक्रोश के बीच मूल्यांकन का कार्य पूरा कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन इन दिनों उत्तर पुस्तिकाएं शिक्षकों के घरों में भेजने का काम कर रहा है। जबकि शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन निर्धारित रेट उत्तर पुस्तिकाओं का भुगतान करे और बनाए गए केन्द्र में मूल्यांकन का कार्य कराया जाए। घरों में उत्तर पुस्तिकाएं भेजना न सिर्फ नियमतः गलत है बल्कि यह शिक्षकों पर अनावश्यक दवाब बनाया जा रहा है।
बैठक कर बहिष्कार का निर्णय
रविवार को कालेज के शिक्षकों ने प्रोफेसर अमीरउल्ला खान के घर में एक बैठक की। जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के भुगतान को लेकर चर्चा करने के साथ ही निर्णय लिया है कि कॉडिनेशन कमेटी द्वारा निर्धारित मूल्यांकन के पैसे का भुगतान विश्वविद्यालय नहीं करता है तो वे उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार करेंगे।
वर्जन
उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए जो रेट निर्धारित है उस हिसाब से पैसे विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं दे रहा है। हम लोगों ने बैठक करके निर्णय लिया है कि जो रेट निर्धारित है उस हिसाब से पैसे दिए जाएंगे। तभी मूल्यांकन का कार्य किया जाएगा।
मोहनलाल तिवारी, पूर्व प्रोफेसर, इकोनॉमिक्स।
प्रोफेसरों द्वारा किस तरह का निर्णय लिया गया है। जिसकी हमें अभी जानकारी नहीं है। अगर ऐसा कुछ है तो चर्चा करके निर्णय लिया जाएगा।
डॉ. आनंद काम्बले, कुलसचिव, एपीएस।

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