भोपाल।
विभाग द्वारा सीटे बढ़ाए जाने के बाद भी छात्र-छात्राओं को एडमिशन नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही पाठ्यक्रमों में कट-ऑफ बढ़ाए जाने की भी मुसीबत समाने आ गई है। जिसके कारण जिन कॉलेजों में 50 फीसदी में भी बीकॉम मे एडमिशन मिल जाया करता था, वहीं आज 65 फीसदी से कम अंक वाले छात्रों को एडमिशन ही नहीं मिल पा रहा है।राजधानी के एमवीएम कॉलेज में सीएलसी में बीएससी पीसीएम का कट ऑफ करीब 70 प्रतिशत गया है। बीएससी के अन्य कॉबिनेशन के अधिकांश पाठ्यक्रमों का कट ऑफ भी 65 प्रतिशत तक गया है। साथ ही जिनके अंक कम है, उन्हें वेटिंग लिस्ट में में रखा गया है।अगर छात्र रेगुलर स्टूडेंट के रूप में पढ़ना चाहते हैं तो उन्हें अल्पसंख्यक कॉलेज जैसे बीएसएसएस, सैफिया आदि में दाखिला लेना होगा। यही स्थिति नूतन, गीतांजलि और बनेजीर कॉलेज में भी बनी हुई है। अधिकांश कॉलेज में बीकॉम के कट ऑफ मार्क्स 60 प्रतिशत के ऊपर हैं। यही स्थिति बीएससी में भी बनी हुई है।
सिर्फ बीकॉम ही क्यों यही हालत इंजीनियरिंग कॉलेजों, बीएससी करने वालों में भी देखने को मिल रहे है।ऐसे में उन छात्रों को सबसे ज्यादा दिक्कत आई है कि जिनके हायर सेकंडरी में 55 फीसदी या उससे कम अंक हैं।इसके साथ ही दूसरी बात यह भी निकलकर सामने आई है कि छात्र अपने मन मुुताबिक कॉलेज पाने के लिए फिर से फार्म भर रहे है, हालांकि उनका एडमिशन पहले ही कॉलेजों में हो चुका है, इसके कारण भी एडमिशन में कई दिक्कते आ रही है।छात्रों का नाम वेटिंग में रखा जा रहा है।माना जा रहा है इस साल कंपिटिशन ज्यादा है, जिसके वजह से छात्रों के एडमिशनों में बड़ी दिक्कत आ रही है।
बता दे कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्राचार्य स्तर पर कॉलेजों की दस फीसदी सीटें बढ़ाने के फरमान जारी किया गया था।
विभाग द्वारा सीटे बढ़ाए जाने के बाद भी छात्र-छात्राओं को एडमिशन नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही पाठ्यक्रमों में कट-ऑफ बढ़ाए जाने की भी मुसीबत समाने आ गई है। जिसके कारण जिन कॉलेजों में 50 फीसदी में भी बीकॉम मे एडमिशन मिल जाया करता था, वहीं आज 65 फीसदी से कम अंक वाले छात्रों को एडमिशन ही नहीं मिल पा रहा है।राजधानी के एमवीएम कॉलेज में सीएलसी में बीएससी पीसीएम का कट ऑफ करीब 70 प्रतिशत गया है। बीएससी के अन्य कॉबिनेशन के अधिकांश पाठ्यक्रमों का कट ऑफ भी 65 प्रतिशत तक गया है। साथ ही जिनके अंक कम है, उन्हें वेटिंग लिस्ट में में रखा गया है।अगर छात्र रेगुलर स्टूडेंट के रूप में पढ़ना चाहते हैं तो उन्हें अल्पसंख्यक कॉलेज जैसे बीएसएसएस, सैफिया आदि में दाखिला लेना होगा। यही स्थिति नूतन, गीतांजलि और बनेजीर कॉलेज में भी बनी हुई है। अधिकांश कॉलेज में बीकॉम के कट ऑफ मार्क्स 60 प्रतिशत के ऊपर हैं। यही स्थिति बीएससी में भी बनी हुई है।
सिर्फ बीकॉम ही क्यों यही हालत इंजीनियरिंग कॉलेजों, बीएससी करने वालों में भी देखने को मिल रहे है।ऐसे में उन छात्रों को सबसे ज्यादा दिक्कत आई है कि जिनके हायर सेकंडरी में 55 फीसदी या उससे कम अंक हैं।इसके साथ ही दूसरी बात यह भी निकलकर सामने आई है कि छात्र अपने मन मुुताबिक कॉलेज पाने के लिए फिर से फार्म भर रहे है, हालांकि उनका एडमिशन पहले ही कॉलेजों में हो चुका है, इसके कारण भी एडमिशन में कई दिक्कते आ रही है।छात्रों का नाम वेटिंग में रखा जा रहा है।माना जा रहा है इस साल कंपिटिशन ज्यादा है, जिसके वजह से छात्रों के एडमिशनों में बड़ी दिक्कत आ रही है।
बता दे कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्राचार्य स्तर पर कॉलेजों की दस फीसदी सीटें बढ़ाने के फरमान जारी किया गया था।

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