रीवा। अपनों से ही अपनों को खतरा होने लगा है। सुनने में बात अटपटी लगती है, लेकिन यह सच है। साइबर सेल में फेक मोबाइल कॉल्स व वाट्सएप, फेसबुक आने वाले अनचाहे मैसेज को भेजने वाले अपने ही होते हैं। माता-पिता व बच्चों के बीच उत्पन्न हो रही दूरियां इसके लिए प्रमुख जिम्मेदार मानी जा रही है।
लगातार रीवा जिले के साइबर सेल में प्राप्त होने वाली शिकायतों में से 90 प्रतिशत शिकायतों में बच्चियों को तंग करने वाले फोन कॉल्स अपनों या अपनों के परिचितों द्वारा किया जाता है। अधिकतर मामलों में खुद उपभोक्ता को इस बात का अंदाजा रहता है कि अमुक काल किसने की है। शुरूआती समय तो उन्हें अच्छा लगता है। लेकिन बाद में जब इन कॉल्स व मैसेजों की संख्या बढ़ती है तो वह शिकायत करने साइबर सेल पहुंच जाते हैं। पड़ताल के बाद जब पता चलता है तो परेशान करने वाला कॉलर अड़ोस, पड़ोस या फिर जान-पहचान वाला निकलता है।
दूरी बन रही वजह
मनोवैज्ञानिक मनोरमा शुक्ला ने बताया कि माता-पिता बच्चों को एडमीशन दिलाने के बाद कोचिंग के सहारे छोड़ देते हैं। लगातार पालक व पाल्य के बीच में बढ़ रही दूरियों के कारण बच्चें खुद को अकेला महसूस करते हैं। जिसके बाद उनके सबसे करीब अगर कोई होता है तो वह टेलीवीजन। जैसे वह देखते हैं उसी तरह की प्रतिक्रिया उनकी होती है और इसके लिए माता-पिता व बच्चों की दूरियां प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं।
मनोवैज्ञानिक मनोरमा शुक्ला ने बताया कि माता-पिता बच्चों को एडमीशन दिलाने के बाद कोचिंग के सहारे छोड़ देते हैं। लगातार पालक व पाल्य के बीच में बढ़ रही दूरियों के कारण बच्चें खुद को अकेला महसूस करते हैं। जिसके बाद उनके सबसे करीब अगर कोई होता है तो वह टेलीवीजन। जैसे वह देखते हैं उसी तरह की प्रतिक्रिया उनकी होती है और इसके लिए माता-पिता व बच्चों की दूरियां प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं।
शिकायतों में बढ़ोत्तरी
2013 तक साइबर सेल की शिकायतों में अमूमन मोबाइल गुमने या चोरी होने की रिपोर्ट प्राप्त होती थी। लेकिन कुछवर्षों से में साइबर सेल में अनचाहे कॉल व फोन का अश्लील बातें करने की शिकायतें बढ़ी हैं। अगर आंकड़े पर नजर दौड़ाए तो पता चलता है कि विगत 8 माह में तकरीबन 400 शिकायतें सेल तक पहुंची हैं। जिसमें अब तक 215 शिकायतों का निराकरण हुआ है। जिसमें 165 मामलों में परिचितों को तंग किया जा रहा था। कुछ मामले तो महाविद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं से जुड़ा था। जिन्हें भली-भांति यह पता था कि फोन करने वाला कौन है। लेकिन शिकायत में उन्होंने नाम नहीं बताया था। जब जांच हुई तो पता चला कि बच्चियां पहले से ही उसे जानती थी।
2013 तक साइबर सेल की शिकायतों में अमूमन मोबाइल गुमने या चोरी होने की रिपोर्ट प्राप्त होती थी। लेकिन कुछवर्षों से में साइबर सेल में अनचाहे कॉल व फोन का अश्लील बातें करने की शिकायतें बढ़ी हैं। अगर आंकड़े पर नजर दौड़ाए तो पता चलता है कि विगत 8 माह में तकरीबन 400 शिकायतें सेल तक पहुंची हैं। जिसमें अब तक 215 शिकायतों का निराकरण हुआ है। जिसमें 165 मामलों में परिचितों को तंग किया जा रहा था। कुछ मामले तो महाविद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं से जुड़ा था। जिन्हें भली-भांति यह पता था कि फोन करने वाला कौन है। लेकिन शिकायत में उन्होंने नाम नहीं बताया था। जब जांच हुई तो पता चला कि बच्चियां पहले से ही उसे जानती थी।
जितनी शिकायतें प्राप्त होती हैं उसमें अमूमन शिकायतकर्ता आरोपियों को पारिवारिक पृष्ठ भूमि से होता है। कई बार विवेचना के दौरान भी यह सिद्घ हुआ है। जिसमें अनचाहे मैसेज, फेक कॉल्स, फेसबुक, वॉट्सएप शामिल हैं। चूंकि मामला लड़कियों व महिलाओं से जुड़ा होता है इसलिए इन मामलों को अतिगोपनीय रखा जाता है।
अखिलेश सिंह, प्रभारी साइबर सेल, रीवा
अखिलेश सिंह, प्रभारी साइबर सेल, रीवा

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