शहडोल। पुलिस कस्टडी में हुई मौत को लेकर खाकी की तानाशाही की चपेट में विधवा हुई महिला ने इसकी शिकायत शहडोल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक से की है। पीड़ित पत्नी और उसके परिवार ने जिन पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाए थे की उनके द्वारा उनके पति की जान ले ली गई और लगातार शिकायत न करने व बयान बदलने का दबाव बनाया, उन पर अब तक कोई कार्यवाई नहीं हुई है। बिजुरी पुलिस पर मामले को दबाने और सबूत मिटाने के आरोप लग चुके हैं बावजूद इसके संबंधित अधिकारी थाना क्षेत्र में मौजूद है जो की उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली और संलग्न की गई रिपोर्ट पर प्रश्न चिन्ह लगाते है।
बिजुरी थाना अंतर्गत पुलिस अभिरक्षा में मिलहु के साथ हुई मारपीट के दौरान गंभीर चोटों के कारण मिलहु तो काल के गाल में समा गया और उसकी मौत के एवज में चंद रुपये और किराने का सामना देकर पुलिसकर्मियों द्वारा मामले को दबाने की कोशिश की गई। इतना ही नही शिकायत के अनुसार मृतक के परिवार पर अनावश्यक दबाव बना कर मामले को दबाने की कोशिश अनावरत जारी है। जिसकी शिकायत मृतक मिलहु केवट की पत्नी चंदा केवट द्वारा पुलिस अधीक्षक अनूपपुर, कलेक्टर अनूपपुर समेत पुलिस महानिरीक्षक के पास की न्याय की उम्मीद के साथ संभागीय पुलिस मुख्यालय पहुंचे परिवार ने स्थानीय पुलिस पर सीएम हेल्पलाइन में की गई शिकायत पर बयान बदलने का दबाव डालने और जांच रिपोर्ट छीन कर सबूत मिटाने के भी आरोप लगाया हैं।
यह हैं मामला
शिकायत के अनुसार मिलहु केवट को 11 सितम्बर को बिजुरी पुलिस द्वारा अवैध रूप से हिरासत में लिया गया और उसके साथ मारपीट की गई जानकारी के अनुसार मिलहु केवट को शराब के नशे में शोरगुल करने के अपराध में कथित तिवारी नामक पुलिस कर्मी द्वारा थाने लाया गया था, जंहा पर पुलिस कर्मियों द्वारा मिलहु की पिटाई की गई, मारपीट के दौरान गंभीर चोट व मानसिंक रूप से प्रताड़ित किया गया। मिलहु को इलाज के लिए पहले अनूपपुर फिर जबलपुर और अंतत: नागपुर में भर्ती करवाया गया, मिलहु को वापस बिजुरी लाया गया जंहा समय समय पर स्वास्थ लाभ हेतु नागपुर व अन्य डॉक्टरों तक सरकारी वाहन से पहुंचाया गया। आखिरकार मिलहु मौत के गाल में समा गया, जिस पर मिलहु के परिवार का आक्रोश सामने आया पुलिस ने अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक मदद भी दी गई।
तबादले की मांग
पीड़ित परिवार ने पुन: संभागीय पुलिस मुख्यालय में लिखिल आवेदन प्रस्तुत करते हुए पुलिस महानिरीक्षक से बताया कि थाना प्रभारी बिजुरी द्वारा पूर्व में भी सबूत मिटाने की कोशिश की गई थी और शिकायत वापस लेने व बयान बदलने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। परिवार के लोगों का कहना है कि जब तक बिजुरी थाना प्रभारी वहां पदस्थ हैं तब तक मामले की निष्पक्ष जांच नही हो सकती, मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी का ट्रांसफर किया जाए। ऐसा नहीं होने पर सामूहिक आत्मदाह करने की घोषणा की है।
इस बारे में शहडोल रेंज के आईजी आईपी कुलश्रेष्ठ का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है। जांच के संबंध में अधिक जानकारी के लिए जांचकर्ता अधिकारी एसडीओपी कोतमा से संपर्क किया जा सकता है।
शिकायत के अनुसार मिलहु केवट को 11 सितम्बर को बिजुरी पुलिस द्वारा अवैध रूप से हिरासत में लिया गया और उसके साथ मारपीट की गई जानकारी के अनुसार मिलहु केवट को शराब के नशे में शोरगुल करने के अपराध में कथित तिवारी नामक पुलिस कर्मी द्वारा थाने लाया गया था, जंहा पर पुलिस कर्मियों द्वारा मिलहु की पिटाई की गई, मारपीट के दौरान गंभीर चोट व मानसिंक रूप से प्रताड़ित किया गया। मिलहु को इलाज के लिए पहले अनूपपुर फिर जबलपुर और अंतत: नागपुर में भर्ती करवाया गया, मिलहु को वापस बिजुरी लाया गया जंहा समय समय पर स्वास्थ लाभ हेतु नागपुर व अन्य डॉक्टरों तक सरकारी वाहन से पहुंचाया गया। आखिरकार मिलहु मौत के गाल में समा गया, जिस पर मिलहु के परिवार का आक्रोश सामने आया पुलिस ने अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक मदद भी दी गई।
तबादले की मांग
पीड़ित परिवार ने पुन: संभागीय पुलिस मुख्यालय में लिखिल आवेदन प्रस्तुत करते हुए पुलिस महानिरीक्षक से बताया कि थाना प्रभारी बिजुरी द्वारा पूर्व में भी सबूत मिटाने की कोशिश की गई थी और शिकायत वापस लेने व बयान बदलने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। परिवार के लोगों का कहना है कि जब तक बिजुरी थाना प्रभारी वहां पदस्थ हैं तब तक मामले की निष्पक्ष जांच नही हो सकती, मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी का ट्रांसफर किया जाए। ऐसा नहीं होने पर सामूहिक आत्मदाह करने की घोषणा की है।
इस बारे में शहडोल रेंज के आईजी आईपी कुलश्रेष्ठ का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है। जांच के संबंध में अधिक जानकारी के लिए जांचकर्ता अधिकारी एसडीओपी कोतमा से संपर्क किया जा सकता है।

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