सिंगरौली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के द्वारा बनाए जा रहे कृषि विज्ञान केंद्र की शुरुआत प्रधानमंत्री करने जा रहे हैं। जिले के देवरा गांव की 35 एकड़ जमीन में विस्तारित कृषि विज्ञान केंद्र को पिछले दो सालों से खोले जाने की बातें की जा रही थीं जिसमें अब सफलता मिल पाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 17 मार्च को नई दिल्ली से इस केंद्र का वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आगाज करने जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि आधुनिक तकनीक से युक्त इस केंद्र के माध्यम से किसानों को बढ़े स्तर पर ग्रीन हाउस खेती, पॉली हाउस खेती, मशरूम की खेती, सब्जियों एवं फल को उगाने, कम लागत में अधिक पैदावार, फसलों को रोगों से बचाने और ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस तरह की खेती की तकनीकों से जिले के पिछड़े गांवों में भी अच्छी पैदावार हो सकेगी और किसान अपनी फसल का उचित मूल्य पाकर दोगुना तक लाभ कमा सकेंगे। इस दिशा में काम करते हुए जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर से पहले ही वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जय सिंह और डॉ. अखिलेश चौबे की नियुक्ति की जा चुकी है।
इस कार्यक्रम के लिए कुछ दिनों पहले ही आईसीएआर असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल वेदप्रकाश चहल के द्वारा संचालक जेएनकेविवि, जबलपुर को निर्देश जारी किये जा चुके हैं। इस केंद्र के जरिए जिले और इससे जुड़े 7 लाख किसानों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 17 मार्च को उद्घाटन के बाद प्रशासकीय भवन, प्रस्तुति केंद्र, किसान हॉस्टल का निर्माण भी शुरु कर दिया जाएगा जिसका खर्च भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के द्वारा वहन किया जाना है।
गौरतलब है कि इस केंद्र की स्थापना के लिए सिंगरौली के विधायक रामलल्लू बैस और एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, जबलपुर की बोर्ड मेंबर और भाजपा नेत्री आशा अरुण यादव पिछले पांच वर्षों से प्रयासरत थीं जिसमें सफलता 2017 में मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद जाकर मिली। विधायक ने इसके लिए जहां भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डॉ. एके सिंह से मिलकर केंद्र की स्वीकृति मांगी वहीं भाजपा नेत्री कृषि विश्वविद्यालय बोर्ड की होने वाली हर तीन महीनें की बैठक में इस संबंध में बोलती रहीं। इन प्रयासों के बाद से ही सिंगरौली को एक कृषि विज्ञान केंद्र की सौगात मिल सकी।

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