उमरिया | बांधवगढ टाईगर रिजर्व ने हाल ही में अपने 50 साल पूरे होने पर जश्न के साथ मनाया, लेकिन अभी भी वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाते हुए बीटीआर प्रबन्धन दिखाई नहीं दे रहा है। पूरे प्रदेश में साल भर में सबसे ज्यादा बाघ मरने की घटना इस नेशनल पार्क में हुई है। विगत 6 सालों में दो दर्जन से ज्यादा बाघों की मौत के साथ कई तेंदुओं के शिकार की घटना घट चुकी है। इन वन्य प्राणियों की सुरक्षा के नाम पर चेनलिंक जालियों से घेरने की कोशिश की जाती है।
कभी किसी स्थान पर चैन लिंक जालियों को लगाया जाता है, फिर उस स्थान से हटा दिया जाता है। इसके अलावा एक दूसरे स्थान पर उसी चैन लिंक जालियों को लगाया जाता है। चैनलिंक जालियों को किसी स्थान पर लगाना और उसे खोल कर दूसरे स्थान पर लगाने के नाम पर बीटीआर प्रबन्धन के द्वारा शासकीय राशि की होली खेली जा रही है। इसकी शिकायत वन्य प्राणियों के द्वारा की गयी है, लेकिन जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती होती है।
जानकारी के अनुसार अभी तक 108 किलोमीटर की सीमा को चैन लिंक जाली के द्वारा बीटीआर की सीमाओं पर लगाया जा चुका है। जालियों को किस स्थान पर लगाना वन्य प्राणियों के लिए सुरक्षित रहेगा, और किस स्थान पर सुरक्षित नहीं रहेगा इसका ध्यान नहीं रखा जा रहा है। वहीं इस भीषण गर्मी में भी पेयजल की सुविधायें बढाने की कोई विशेष प्रयास नहीं किये जा रहे हैं। जिला पंचायत द्वारा वन्य प्राणियों के लिए मनरेगा के तहत बनाये गये जलाशय ही इस समय चीतलों और बारहसिंगाओं का सहारा बन रहा है। जिसे मगधी रेंज के समीप ताला रोड से ही देखा जा सकता है।
जारी है जालियों का हटाना लगाना
विकास निधि के पैसों का दुरूपयोग करने के लिए सुरक्षा के नाम पर जालियों को हटाना और लगाने का कार्य पूरे वर्ष भर चलता रहता है। इसकी षिकायत वन्यजीव प्रेमियों के द्वारा की गयी है। उनके अनुसार चैनलिंक जालियां कहां सबसे ज्यादा उपयोगी रहेगी, और कहां इसकी जरूरत नहीं है, इसके लिए कोई होमवर्क नहीं किया गया है। इससे जालियों को मनचाहे तरीके से हटाना और लगाने का कार्य पूरे साल भर चालू रहता है।
विकास निधि के पैसों का दुरूपयोग करने के लिए सुरक्षा के नाम पर जालियों को हटाना और लगाने का कार्य पूरे वर्ष भर चलता रहता है। इसकी षिकायत वन्यजीव प्रेमियों के द्वारा की गयी है। उनके अनुसार चैनलिंक जालियां कहां सबसे ज्यादा उपयोगी रहेगी, और कहां इसकी जरूरत नहीं है, इसके लिए कोई होमवर्क नहीं किया गया है। इससे जालियों को मनचाहे तरीके से हटाना और लगाने का कार्य पूरे साल भर चालू रहता है।
नहीं हो रही विशेष पेयजल व्यवस्था
जिला पंचायत ने मनरेगा के तहत जलाशयों का निर्माण किया था, वे ही इस समय वन्यप्राणियों के लिए पेयजल का आधार बने हुए है। तत्कालीन सीईओ अक्षय सिंह ने सन् 2010-11 में कई जलाशयों का निर्माण कार्य पूरे बीटीआर क्षेत्र के आसपास करवाये थे। मगधी रेंज के समीप वाला बडा सा जलाशय तो ताला-मानपुर रोड के एकदम समीप है। इस जलाशय में वन्यप्राणियों को कितनी राहत मिल रही है, इसका नजारा तो इस सड़क से ही दिख जाता है। इसी प्रकार के अन्य जलाशयों के निर्माण के द्वारा ही भीषण गर्मी में वन्यप्राणियों को राहत मिल सकती है।
जिला पंचायत ने मनरेगा के तहत जलाशयों का निर्माण किया था, वे ही इस समय वन्यप्राणियों के लिए पेयजल का आधार बने हुए है। तत्कालीन सीईओ अक्षय सिंह ने सन् 2010-11 में कई जलाशयों का निर्माण कार्य पूरे बीटीआर क्षेत्र के आसपास करवाये थे। मगधी रेंज के समीप वाला बडा सा जलाशय तो ताला-मानपुर रोड के एकदम समीप है। इस जलाशय में वन्यप्राणियों को कितनी राहत मिल रही है, इसका नजारा तो इस सड़क से ही दिख जाता है। इसी प्रकार के अन्य जलाशयों के निर्माण के द्वारा ही भीषण गर्मी में वन्यप्राणियों को राहत मिल सकती है।
चैनलिंक जालियों वन्यप्राणियों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगायी गयी है। क्षेत्र की जरूरत के अनुसार इसमें फेरबदल की जरूरत रहती है। वन्यजीवों के पेयजल के लिए बीटीआर क्षेत्र में पर्याप्त व्यवस्थाये की गयी हैं।
मृदुल पाठक,फील्ड डायरेक्टर बीटीआर
मृदुल पाठक,फील्ड डायरेक्टर बीटीआर

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