उमरिया। मन में कुछ कर गुजरने की तमन्ना और कुछ पाने का जज्बा हो तो सफलताएं चरण चूमने लगती हैं। उमरिया जिले के आदिवासी बाहुल्य ग्राम कनेरी की शांति सिंह मरावी, पिता उदयभान सिंह मरावी ने B.sc स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात पुलिस मे भर्ती होना चाहा इसके लिए पहली बार पुलिस भर्ती में शामिल भी हुईं, लेकिन असफल रही। इसी दौरान सशक्त वाहिनी के तहत जिला मुख्यालय में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओ में भर्ती के लिए तीन माह का प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर शांति सिंह मरावी को मिला।
पुलिस मे भर्ती होने की परिकल्पना के साथ पूरी तन्मयता, लगन एवं निष्ठा के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर वर्ष 2017-18 की पुलिस भर्ती में जाने का अवसर मिला जिसमें लिखित एवं शारीरिक परीक्षा के साथ साथ मेडिकल में भी उत्तीर्ण होकर मैरिट सूची में शांति सिंह मरावी ने सातवां स्थान प्राप्त किया। इनकी पदस्थापना पुलिस अधीक्षक शहडोल के अधीन की गई।
पुलिस कांस्टेबल में शांति सिंह की नियुक्ति होने पर उनके माता-पिता, भाई-बहन एवं चिर-परिचितों ने खुशी जाहिर करते हुए बधाईयां दी हैं। होनहार शांति सिंह मरावी एक भाई एवं चार बहनों में सबसे छोटी हैं। बचपन से ही खेल-कूद एवं पढाई के प्रति गहरी रूचि रखने वाली मरावी कक्षा 12 में 55 प्रतिशत और बीएससी में 66 प्रतिशत अंक से पास हुईं। पिता गांव से 50 किमी दूर उमरिया नगर में पढाई के लिए भेजने को राजी नही हो रहे थे लेकिन बेटी की जिद के कारण उन्हे झुकना पड़ा। शांति सिंह मरावी ने बताया कि नौकरी की पहली सीढी कांस्टेबल के पद से शुरू हुई है लेकिन लक्ष्य है पुलिस अधिकारी बनने का, इसके लिए सतत प्रयास जारी रहेगा।
शांति कहती हैं कि उनका बचपन में स्कूल के समय से ही खेल कूद के प्रति रूझान रहा और स्कूल एवं महाविद्यालय स्तर तक वालीवाल, कबड्डी एवं गोला फेंक प्रतियोगिताओ में जिला, संभाग एवं राज्य स्तर पर जबलपुर, सतना एवं रीवा वो खेलने के लिए गईं। इस दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओ में पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। शांति सिंह मरावी ने निशुल्क प्रशिक्षण देने के लिए जिला प्रशासन एवं प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार प्रकट किया है।

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