सिरमौर। जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दूर स्थित क्योटी मार्ग में वाहनों का जाम लोगों के लिए मुसीबत बन चुका है। जहां सुबह 8 बजे के बाद सड़क के दोनों तरफ तथा बीच रोड में यात्री बसें, बिना परमिट की टैक्सियां तथा ऑटो इस तरह आकर खड़े हो जाते हैं कि दो पहिया वाहनों के निकलने के लिए भी जगह शेष नहीं रह जाती है। पैदल चलने वालों को भी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
सड़क तक फैली दुकान
एक तरफ जहां मुख्य मार्ग पर वाहनों का हाल ऐसा है कि लोगों को निकलने के लिए जगह नहीं बचती है। वहीं कुछ सरहंग किस्म के दुकानदारों ने तो रोड की पटरी तक अपनी दुकानों का विस्तार कर लिया है। रोड के पचासवां तक पक्का निर्माण कराने के बाद अब पटरी के करीब ट्रक बरसाती तिरपाल व अन्य सामान फैलाकर दुकानदारी करते देखा जा सकता है। यह सब कुछ नगर प्रशासन एवं पुलिस-प्रशासन प्रतिदिन देखता रहता है। किन्तु नगर को अतिक्रमण मुक्त करके सुन्दर बनाने की बात करने वाले नगर परिषद के कर्मचारी, सीएमओ, पार्षद एवं अध्यक्ष अनजान बने हुए हैं।
एक तरफ जहां मुख्य मार्ग पर वाहनों का हाल ऐसा है कि लोगों को निकलने के लिए जगह नहीं बचती है। वहीं कुछ सरहंग किस्म के दुकानदारों ने तो रोड की पटरी तक अपनी दुकानों का विस्तार कर लिया है। रोड के पचासवां तक पक्का निर्माण कराने के बाद अब पटरी के करीब ट्रक बरसाती तिरपाल व अन्य सामान फैलाकर दुकानदारी करते देखा जा सकता है। यह सब कुछ नगर प्रशासन एवं पुलिस-प्रशासन प्रतिदिन देखता रहता है। किन्तु नगर को अतिक्रमण मुक्त करके सुन्दर बनाने की बात करने वाले नगर परिषद के कर्मचारी, सीएमओ, पार्षद एवं अध्यक्ष अनजान बने हुए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि परिषद के कर्मचारियों, अधिकारियों की ऊपरी कमाई अवैध विस्तार से हो रही है। यही वजह है कि कार्रवाई नहीं की जाती। कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार पुलिस विभाग के नुमाइन्दे दिन में कई बार इन सड़कों से गुजरते है। लेकिन रोड में घंटों से खड़े वाहनों को किनारे खड़ा करने की हिदायत देने से परहेज करते हैं। सड़क पर खड़े रहने वाले वाहनों और अवैध अतिक्रमण से अन्य दुकानदारों को आपत्ति भी होती है क्योंकि ऐसी स्थिति में अंदर की दुकाने ओझल हो जाती हैं। यूं तो अभी तक कोई बड़ी घटना या दुर्घटना नहीं हुई है। हल्की चोंट-खरोच तथा तू-तू, मैं-मैं के बाद मामला सुलझ जाता रहा है। लेकिन सरहंगों की दादागीरी तथा प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता के चलते किसी दिन बड़ी घटना या दुर्घटना घटित हो सकती है। शायद प्रशासन को उसी दिन का इंतजार है।

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