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अध्यापकों के संघर्षों का नतीजा संविलियन पर लगी कैबिनेट की मुहर || REWA NEWS


वर्षों बाद जिले के करीब साढ़े पांच हजार अध्यापक होंगे लाभान्वित

रीवा। शिक्षा विभाग में अध्यापकों के संविलियन पर कैबिनेट की मुहर लगने के बाद अध्यापकों में एक ओर जहां खुशी की लहर दौड़ गई है। वहीं दूसरी ओर अध्यापक परेशान भी हैं। करीब 24 वर्षों बाद अध्यापक शिक्षा विभाग के अंग बन सकेंगे। कैबिनेट में अध्यापकों के संविलियन का निर्णय मंजूर किए जाने के बाद यहां अध्यापकों के विभिन्न संगठनों ने हर्ष व्यक्त किया है। लेकिन पदनाम में परिवर्तन की खबर से मायूस भी हैं।

दूसरे विभागों से संबद्ध रहे अध्यापक 
शिक्षा अधिकारियों के मुताबिक शासन स्तर से इस बावत आदेश जारी होने के बाद यहां जिले के करीब साढ़े पांच हजार अध्यापक शिक्षक बनेंगे। अभी तक अध्यापक जिला पंचायत व नगर निगम के तहत अंतर्गत आते रहे हैं। शिक्षा विभाग में संविलियन के बाद अध्यापक शिक्षक संवर्ग में शामिल होंगे। शिक्षा विभाग से उन्हें वह सभी सुविधाएं मिलने लगेंगी, जो शिक्षकों को मिलती रही हैं। निर्णय पर मप्र. शासकीय अध्यापक संगठन व आजाद अध्यापक संघ सहित अन्य अध्यापक संगठनों ने प्रसन्नता व्यक्त की है।

पदनाम बदले जाने की चर्चा 
निर्णय के बाद अध्यापकों में जहां खुशी की लहर है। वहीं दूसरी ओर पदनाम बदले जाने की चर्चा से अध्यापक परेशान भी हैं। दरअसल चर्चाओं पर गौर करें तो अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन अलग पदनाम से होगा। नया पदनाम प्राथमिक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक व उच्च माध्यमिक शिक्षक होगा जबकि शिक्षा विभाग में पदनाम सहायक शिक्षक, शिक्षक व उच्च श्रेणी शिक्षक है।

अध्यापकों के संघर्षों का नतीजा
 संविलियन के निर्णय पर कैबिनेट की मुहर लगने के बाद शिक्षक संघ मप्र. के प्रांतीय प्रवक्ता राजेंद्र सिंह का कहना है कि अध्यापक २३ वर्ष बाद शिक्षा विभाग में शामिल होंगे। मप्र. शिक्षक कांग्रेस के आबाद खान ने इसे संघर्षों का नतीजा माना है। मप्र. शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने भी अध्यापकों को बधाई दी है।

विचाराधीन अध्यापक भी रहेंगे शामिल
 विभाग के सूत्रों की माने तो संविलियन में वह अध्यापक भी शामिल होंगे, जिनका नियुक्ति सहित अन्य दूसरे प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं। संविलियन के बाद शिक्षक बनने पर भी उन पर न्यायालय की ओर से जारी आदेश के तहत कार्यवाही की जाएगी।

ब्यूरो रिपोर्ट रीवा (Rituraj Dwivedi)

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