सतना। अरब सागर में सिस्टम न होने से मानसून को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल रही तो इधर बंगाल की खाड़ी में बना एक सिस्टम उसे आसाम और उड़ीसा की तरफ ढकेल रहा है। इन सबके चलते मानसून एक्सप्रेस की गति धीमी पड़ी है। मौजूदा समय वह रायपुर छत्तीसगढ़ से आगे बढ़कर मध्यप्रदेश के बार्डर पर पहुंच चुकी है।
अनुमान है कि यदि उसकी ऐसी ही रफ्तार रही तो मंगलवार की शाम तक मध्यप्रदेश में प्रवेश कर जाएगी और 14 और 15 जून तक सतना में होगी। उसकी सही स्थिति की जानकारी तो मंगलवार की शाम तक ही होगी पर यह तय है कि मानसून पहुंचने के बाद भी अच्छी बारिश के लिए 22 जून तक का इंतजार करना होगा।
एक सप्ताह तक रहेगा कमजोर
मानसून मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर पहुंच चुका है। कुछ मौसमविद् उसके प्रदेश में प्रवेश हो जाने का दावा कर रहे हैं पर अभी तक प्रदेश के मौसम विबाग द्वारा इसकी घोषणा नहीं की गई। वह मध्यप्रदेश पहुंचा या एक दो दिन में पहुंच जाएगा इसके मत अलग-अलग हो सकते हैं पर यह सभी कह रहे हैं कि वह अभी एक सप्ताह कमजोर रहेगा। स्थानीय मौसम केन्द्र प्रभारी आरके श्रीवास्तव का कहना है कि अगले 24 घंटे में वह शिवनी और मंडला के रास्ते मध्यप्रदेश में प्रवेश करेगा और यदि यही रफ्तार रही तो 14-15 को सतना में दस्तक देगा पर अभी बारिश कमजोर ही रहेगी।
इधर मौसम की प्रमुख निजी वेबसाइट स्काईमेट का कहना है कि उत्तरी छत्तीसगढ़ में 8 जून को मॉनसून ने दी थी दस्तक। सोमवार को मॉनसून आगे बढ़ा और राजनंदगाँव, धमतरी, दुर्ग, जगदलपुर, कांकेर और सुकमा में भी पहुंच गया है। अनुमान है कि अगले 24 से 48 घंटों में छत्तीसगढ़ में मॉनसून कुछ और आगे बढ़ेगा। लेकिन मध्य प्रदेश को संभवत: लंबा इंतजार करना पड़ सकता है क्योंकि अगले 48 घंटों के बाद मॉनसून एक सप्ताह तक कमजोर रहेगा और इसकी प्रगति भी धीमी होगी। इस बीच त्रिपुरा से छत्तीसगढ़ होते हुए तेलंगाना तक एक ट्रफ रेखा बनी है। इसके प्रभाव से बंगाल की खाड़ी से नमी लिए हवाएं मध्य भारत में पहुंच रही हैं। इसके चलते अनुमान है कि अगले 2 दिनों तक मध्य प्रदेश के पूर्वी जिलों में कई जगहों पर गर्जना के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है।
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