सतना। सरकार गरीबों के लिए तरह-तरह की स्वास्थ्य योजनाओं का बखान करती है। इन दिनों आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर केन्द्र व राज्य के मुखिया खूब वाहवाही लूट रहे हैं। योजनाएं हैं तो लेकिन धरातल पर नहीं। असल में गरीब का इनसे कोई वास्ता नहीं है न ही इनका लाभ दो वक्त की रोटी संजोने वाले हितग्राहियों को मिलता। मानवता इस कदर शर्मसार हो रही है कि अपने ही कलेजे के टुकड़े का मृत शरीर गोद में लेकर बिलखते हुए पैदल चलना पड़ रहा है वो भी कोसों दूर।
हद हो गई अधिकारी अफसर इस गर्मी में वातानुकूलित लग्जरी गाड़ियों में चलते हैं और गरीब के शव के लिए एक शव वाहन तक सरकारी व्यवस्था में नहीं है। जानकारी के अनुसार मझगवां की मलगौसा ग्राम पंचायत के रामनगर खोखला निवासी मवासी परिवार की सात वर्षीय बच्ची की निमोनिया से मौत हो गई और मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से घर तक जाने वाहन नसीब न हुआ क्या यही शिव सरकार का आयुष्मान है?
कैंसिल हो गई 108
सूत्रों के मुताबिक, 108 एम्बुलेंस को कॉल किया गया था कि वह गंभीर बच्ची को मझगवां से सतना जिला चिकित्सालय ले जाए और उसे वहां भर्ती कराएं, लेकिन बच्ची की मौत होने के बाद 108 को डॉक्टरों द्वारा कैंसिल कर दिया गया। लिहाजा एक तो गरीबी, दूसरा अपनी ही गोद सूनी होने के गम ने फूलचंद मवासी को 16 किलोमीटर पैदल चलने पर मजबूर कर दिया। मौत के बाद भी अस्पताल के जिम्मेदारों ने उसे शव ले जाने के लिए कोई एम्बुलेंस मुहैया नहीं कराई। माना कि शव वाहन मझगवां में नहीं है लेकिन एम्बुलेंस में शव ले जाना पॉप नहीं है। गरीब इस दुख के क्षण में कहीं भी मानवता नहीं दिखाई गई।
सूत्रों के मुताबिक, 108 एम्बुलेंस को कॉल किया गया था कि वह गंभीर बच्ची को मझगवां से सतना जिला चिकित्सालय ले जाए और उसे वहां भर्ती कराएं, लेकिन बच्ची की मौत होने के बाद 108 को डॉक्टरों द्वारा कैंसिल कर दिया गया। लिहाजा एक तो गरीबी, दूसरा अपनी ही गोद सूनी होने के गम ने फूलचंद मवासी को 16 किलोमीटर पैदल चलने पर मजबूर कर दिया। मौत के बाद भी अस्पताल के जिम्मेदारों ने उसे शव ले जाने के लिए कोई एम्बुलेंस मुहैया नहीं कराई। माना कि शव वाहन मझगवां में नहीं है लेकिन एम्बुलेंस में शव ले जाना पॉप नहीं है। गरीब इस दुख के क्षण में कहीं भी मानवता नहीं दिखाई गई।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अंतर्गत आने वाले मलगौसा ग्राम पंचायत के रामनगर खोखला निवासी एक मवासी परिवार के सात वर्षीय बेटी प्रतिज्ञा निमोनिया से बुरी तरह पीड़ित थी। उसे परिजनों द्वारा किसी कदर 1 जून की देर रात सीएचसी मझगवां में भर्ती कराया गया, जहां डॉ. संदीप द्विवेदी ने मरीज को अटैण्ड कर उसका इलाज शुरू किया। जानकारी यह मिली कि जब प्रतिज्ञा को अस्पताल लाया गया तो वह बेहद गंभीर स्थिति में थी, उसकी जान बचा पाना मुश्किल था।
दरअसल मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अंतर्गत आने वाले मलगौसा ग्राम पंचायत के रामनगर खोखला निवासी एक मवासी परिवार के सात वर्षीय बेटी प्रतिज्ञा निमोनिया से बुरी तरह पीड़ित थी। उसे परिजनों द्वारा किसी कदर 1 जून की देर रात सीएचसी मझगवां में भर्ती कराया गया, जहां डॉ. संदीप द्विवेदी ने मरीज को अटैण्ड कर उसका इलाज शुरू किया। जानकारी यह मिली कि जब प्रतिज्ञा को अस्पताल लाया गया तो वह बेहद गंभीर स्थिति में थी, उसकी जान बचा पाना मुश्किल था।
डॉक्टर ने परिजनों से बताया कि इसे सतना रेफर करना पड़ेगा, हालत बहुत नाजुक है। जब तक 108 एम्बुलेंस आती है उसका इलाज किया जा रहा है। डॉक्टर ने इमरजेंसी को कॉल कर सूचना दी, लेकिन 15 मिनट के अंदर ही प्रतिज्ञा ने अपनी अंतिम सांस ले ली। उसे रेफर करने की नौबत नहीं आई। खबरें ये भी हैं कि इसकी मौत निमोनिया से नहीं बल्कि मीजल्स के प्रकोप से हुई है। हालांकि यह तो जांच का विषय है लेकिन सतना सीएमएचओ का जिस तरह से जवाब है ऐसे में जांच होना मुमकिन नहीं है। सूत्रों की मानें तो इस बच्ची का इलाज पहले किसी झोला छाप ने किया है, जिन्हें पकड़ने व जेल में डालने की खूब कवायद हुई लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात, और मासूम की जान चली गई।
हद है! CMHO को तो पता ही नहीं
सतना का भी अजब दुर्भाग्य है, ऐसे हाथों में स्वास्थ्य विभाग की कमान दे दी जिन्हें कुछ मालूम ही नहीं रहता। जनाब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एके अवधिया यह तक नहीं जानते कि उनके मझगवां का बीएमओ कौन है? आलाधारी अधिकारी के जिले में एक बच्ची की मौत होती है उसे शव वाहन नहीं मिलता और साहब कहते हैं कि उन्हें कुछ मालूम ही नहीं है? जब मुख्यालय में रहोगे ही नहीं तो कबूतर उड़ के खबर देने नहीं आएगा? ऐसे हाथों में सतना जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की कमान है जो खुद गैर जिम्मेदाराना जवाब देते हैं।
सतना का भी अजब दुर्भाग्य है, ऐसे हाथों में स्वास्थ्य विभाग की कमान दे दी जिन्हें कुछ मालूम ही नहीं रहता। जनाब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एके अवधिया यह तक नहीं जानते कि उनके मझगवां का बीएमओ कौन है? आलाधारी अधिकारी के जिले में एक बच्ची की मौत होती है उसे शव वाहन नहीं मिलता और साहब कहते हैं कि उन्हें कुछ मालूम ही नहीं है? जब मुख्यालय में रहोगे ही नहीं तो कबूतर उड़ के खबर देने नहीं आएगा? ऐसे हाथों में सतना जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की कमान है जो खुद गैर जिम्मेदाराना जवाब देते हैं।

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