सतना। 10 जून से शुरू होने जा रहे सत्र में शिक्षकों, अध्यापकों सहित शिक्षा विभाग के सभी कर्मचारियों-अधिकारियों को एक फिर से एम शिक्षा मित्र एप से ही अपनी हाजिरी आॅनलाइन ही अपडेट करनी होगी। इससे पहले भी स्कूल शिक्षा विभाग ने 1 अप्रैल से प्रदेश के समस्त सरकारी स्कूलों के शैक्षणिक स्टॉफ समेत अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए यह व्यवस्था लागू की थी।
लेकिन शिक्षक संघों के विरोध और प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मौखिक तौर पर घोषणा की थी कि अब शिक्षकों को ई-अटेंडेंस नहीं लगानी पडेÞगी। स्कूल शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव दीप्ती गौड़ मुखर्जी ने वीडियो कान्फ्रेसिंग में साफ कर दिया कि शिक्षा विभाग में ई-अटेंडेंस जारी रहेगी। डीईओ, डीपीसी सहित अधिकारी-कर्मचारियों को जहां ई-अटेंडेंस लगाने के निर्देश दिए गए।
सरकार का यू-टर्न, 10 जून से अनिवार्य
ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद जल्द ही स्कूले पुन: संचालित होने जा रही हैं। जहां विभाग का तमाम अमला 10 जून से स्कूलों में अपनी दस्तक देगा, वही 15 जून से स्कूलों में एक बार फिर शैक्षणिक गतिविधिया संचालित होगी। इसी के साथ ही शिक्षा विभाग के तमाम कर्मचारियों के लिए 10 जून से एप आधारित ई-अटेंडेंस लगाना अनिवार्य होगा।
ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद जल्द ही स्कूले पुन: संचालित होने जा रही हैं। जहां विभाग का तमाम अमला 10 जून से स्कूलों में अपनी दस्तक देगा, वही 15 जून से स्कूलों में एक बार फिर शैक्षणिक गतिविधिया संचालित होगी। इसी के साथ ही शिक्षा विभाग के तमाम कर्मचारियों के लिए 10 जून से एप आधारित ई-अटेंडेंस लगाना अनिवार्य होगा।
नहीं होगा वेतना जनरेट
वैसे तो पहले ही एम शिक्षा मित्र से मिलने वाली सुविधाएं और इसके संचालन के लिए प्रशिक्षण स्थानीय स्तर दिया जा चुका है। लेकिन मोबाइल के माध्यम से जो भी अटेंडेस नहीं लगाएगा, उसका वेतन भी जनरेट नहीं होगा। ऐसे में उपस्थिति रजिस्टर के आधार पर नहीं बल्कि मोबाइल के आधार पर वेतन मिलेगा।
वैसे तो पहले ही एम शिक्षा मित्र से मिलने वाली सुविधाएं और इसके संचालन के लिए प्रशिक्षण स्थानीय स्तर दिया जा चुका है। लेकिन मोबाइल के माध्यम से जो भी अटेंडेस नहीं लगाएगा, उसका वेतन भी जनरेट नहीं होगा। ऐसे में उपस्थिति रजिस्टर के आधार पर नहीं बल्कि मोबाइल के आधार पर वेतन मिलेगा।
इन्दौर का मॉडल, चार सालों से लटका
सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक स्टॉफ की मनमानी और पारदर्शिता लाने के ई-अटैंडेंस के लिए इससे पहले भी कई बार प्रयास किए जा चुकें हैं, लेकिन हर बार किसी न किसी कारणों के चलते यह व्यवस्था टल गई है। शिक्षा विभाग में ई-अटेंडेंस को लेकर पिछले 4 साल से शिक्षा विभाग और शिक्षकों के बीच रस्साकशी चली आ रही है। एम शिक्षा मित्र एप से ई-अटेंडेंस की नई व्यवस्था सितंबर 2015 से लागू की गई है। इस व्यवस्था की सबसे पहले शुरूआत इन्दौर में हुई थी। यही के मॉडल को अब मूर्त रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक स्टॉफ की मनमानी और पारदर्शिता लाने के ई-अटैंडेंस के लिए इससे पहले भी कई बार प्रयास किए जा चुकें हैं, लेकिन हर बार किसी न किसी कारणों के चलते यह व्यवस्था टल गई है। शिक्षा विभाग में ई-अटेंडेंस को लेकर पिछले 4 साल से शिक्षा विभाग और शिक्षकों के बीच रस्साकशी चली आ रही है। एम शिक्षा मित्र एप से ई-अटेंडेंस की नई व्यवस्था सितंबर 2015 से लागू की गई है। इस व्यवस्था की सबसे पहले शुरूआत इन्दौर में हुई थी। यही के मॉडल को अब मूर्त रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
- वीसी में स्कूल शिक्षा प्रमुख सचिव का निर्देश
- 30 मार्च को सीएम ने ई-अटेंडेंस समाप्त करने की थी घोषणा
- 5 जून तक एप डाउनलोड करने की मोहलत
- वेतन से जोड़ी अटेंडेंस

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