सेमरिया । 2008 से अस्तित्व में आई सेमरिया विधानसभा सीट भाजपा की परंपरागत सीट रही है, लेकिन क्या इस बार भी यहां भाजपा कमल की फसल लहलहा पाएगी? सवाल इसलिए क्योंकि यह सीट पूर्व विधायक अभय मिश्रा की बदौलत भाजपा की मानी जाती रही है। अभय मिश्रा अब भाजपा का साथ छोड़ कांग्रेस के साथ हैं। लिहाजा अब यहां के समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। साम, दाम, दंड, भेद में माहिर अभय मिश्रा के न रहने पर यह सीट चुनावी दंगल का रूप ले चुकी है।
जंगल व जमीन के मामले में धनी सेमरिया विधानसभा क्षेत्र में जातीय समीकरण का दबदबा रहा है। यही कारण है कि दो पंचवर्षीय से एक ही परिवार में पति- पत्नी बतौर विधायक रह चुके हैं। क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य व सड़क की समस्या अन्य विधानसभा की तरह ही हैं। टिकट बंटवारे के साथ ही चुनावी समीकरण स्पष्ट दिखाई देगा। टिकट वितरण ही यहां जीत की आधारशिला रखेगा।
यह सीट अभय मिश्रा के परिवार से निकालना विपक्ष के दलों को मुश्किल साबित हो सकती है। ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र होने के साथ ही अनुसूचित जाति जनजाति मतदाताओं की संख्या निर्णायक भूमिका निभा सकती है। अगर नीलम मिश्रा अपने पति की तरह भाजपा छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता लेती हैं तो ओबीसी मतदाता निर्णायक की भूमिका में पहुंच जाएंगे। यदि बसपा पटेल समुदाय से प्रत्याशी खड़ा करती तो 15 हजार वोट बैंक के साथ वह किसी का भी खेल बिगाड़ सकती है। इतना ही नहीं यदि मतदान 50-55 प्रतिशत के बीच रहा तो वह चुनाव जीत भी सकती है।
फैक्ट फाइल -
2013 का परिणाम -
नीलम अभय मिश्रा - भाजपा 36173
पंकज पटेल - बसपा 30196
त्रियुगी नारायण शुक्ला - कांग्रेस 19770
पिछले चुनावों में मिले वोट -
पार्टी 2008 प्रतिशत
भाजपा 25875 27.81
बसपा 20090 21.59
कांग्रेस 17375 18.67
नोट: सेमरिया विधानसभा क्षेत्र 2008 में अस्तित्व में आया है। इसके पहले यह सिरमौर विधानसभा क्षेत्र में आता था।
जातीय समीकरण -
ब्राह्मण मतदाता-45 से 50 हजार
क्षत्रिय मतदाता-12 से 13 हजार
पटेल मतदाता-15 से 20 हजार,
यादव मतदाता-10 हजार
कुल मतदाता - 1, 80 ,704
मतदान केंद्र - 243
पुरुष मतदाता - 96496
महिला मतदाता - 84208
2018 में संभावित प्रत्याशी -
भाजपा - नीलम अभय मिश्रा, रीवा जनपद अध्यक्ष केपी त्रिपाठी, संजय द्विवेदी, कबीर मिश्रा और राकेश कुमार
कांग्रेस - अभय मिश्रा, त्रियुगी नारायण शुक्ला, सत्यनारायण शर्मा, अजय शुक्ला और सज्जन पटेल
बसपा- पंकज पटेल, लालमणि पांडेय
क्षेत्र की बड़ी समस्याएं -
दस्यु प्रभावित क्षेत्र होने के साथ ही यहां बेरोजगारी भी बड़ी समस्या है। अधिकतर लोग खेती बाड़ी से अपना जीवन यापन करते थे, लेकिन नीलगाय की समस्या ने उन्हें भी बेरोजगार कर दिया है। बड़कुईया में सबसे ज्यादा वन उत्खनन होता है।
पांच बड़े वादे और स्थिति -
बसामन मामा धार्मिक स्थान होने के बाद भी इसका जीर्णोद्धार नहीं हो पाया है, यहां गौशाला तो खोली गई लेकिन समुचित व्यवस्था नहीं है। विश्व स्तर पर प्रसिद्ध पुरवा वॉटर फाल यहां पर है, लेकिन इसे विकसित नहीं किया है ? खजुराहो से बनारस कॉरीडोर को जोड़ने की बात कही थी, लेकिन संभव नहीं हो पाया।
अगले चुनाव में हो सकता है कांग्रेस-बसपा में मुकाबला -
वर्तमान विधायक नीलम मिश्रा के पति अभय मिश्रा के भाजपा से कांग्रेस में जाने के कारण अब राजनैतिक समीकरण उलझ गए हैं। अभय मिश्रा ने ही सेमरिया विधानसभा सीट को भाजपा का गढ़ बनाया था। एक ओर जहां अभय मिश्रा के कांग्रेस में शामिल होने से बसपा का उदय हो गया है, वहीं दूसरी ओर भाजपा के पास अभय मिश्रा का विकल्प नहीं है। ऐसे में बसपा ने चुनाव को जीतने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है। आगामी चुनाव की बात करें तो अब कांग्रेस और बसपा में ही कड़ा मुकाबला देखने मिलेगा ।
आमनेसामने -
विधायक से सीधी बात -
क्षेत्र का विकास हुआ है। हालांकि कुछ काम नहीं हो पाएं हैं जिसके लिए लगातार प्रयास किया गया है, लेकिन अपेक्षाकृत सहयोग नहीं मिल पाया है, जिससे वह बड़े काम नहीं हो पाएं हैं, लेकिन जहां तक विधायक निधि की बात है तो कई काम किए गए हैं। -नीलम अभय मिश्रा, भाजपा विधायक
दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी का मत सेमरिया विधानसभा क्षेत्र में विकास तेज गति से नहीं हुआ है। यहां की सड़कें जर्जर हैं। पेयजल समस्या बनी हुई है लेकिन विधायक पति को राजनीति करने से फुर्सत नहीं है। वह कभी भाजपा में तो कभी कांग्रेस में हाथ आजमाते रहते हैं। वर्तमान में जिला पंचायत अध्यक्ष होने के बाद भी क्षेत्र का विकास नहीं हुआ है। -पंकज पटेल, प्रत्याशी बसपा
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